पास होना यहां आसान, पर लिखना-पढऩा आज भी मुश्किल
मध्यप्रदेश के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में बच्चे अगली कक्षाओं में पहुंच तो जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उनमें से अधिकांश पिछली कक्षाओं की किताबें भी पढऩे में सक्षम नहीं हैं। प्रदेश के स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की रीडिंग स्किल और गणित पूरे देश में सबसे कमजोर पाया गया है। पूरे देश में इस मामले में उत्तरप्रदेश के बाद मप्र दूसरे नंबर पर है।
यह खुलासा एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट 2016 में हुआ है। वर्ष 2010 में जहां 56.7 फीसदी कक्षा पांचवी के बच्चे जो कक्षा-2 के स्तर का पाठ पढ़ पाने में सक्षम थे, वहीं वर्ष 2014 के सर्वे में यह 34 प्रतिशत था , वही वर्ष 2016 में यह आकड़ा 38.7 हुआ है । पिछले 2 सालो में कवक 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई तो है पर यह ऊंट के मुँह में जीरा जैसा है । वर्ष 2016 की रिपोर्ट में गणित में कक्षा 5 के 38.5 प्रतिशत बच्चे ही साधारण दो अंकीय घटाव का सवाल हल कर पते है वही 19.4 प्रतिशत बच्चें ही दो अंको का एक अंक के साथ भाग हल कर पा रहे है वाही कक्षा 8 के बच्चों में यह आकड़ा 33.4 प्रतिशत है । 5 में पहुँच कर बच्चा को उसके 3 कक्षा पहले की पुस्तक पढ़नी ही नहीं आ रही है ! तो सोचिये कि वह 3 आगे की कक्षा तक कैसे पंहुच गया, और क्या वह अपना पाठ्यक्रम पूरी तरह समझ पाता होगा ? इसका जबाब तो बच्चा का मन ही जनता होगा जब वह आठवी कक्षा पूर्ण होने के बाद प्रारंभिक अनिवार्य शिक्षा पास का सर्टिफिकेट मिल जाता है पर उसे न तो सही हिन्दी पढ़नी आती है और न ही साधारण गणित । अधिकांश स्कूलों का ये हाल है कि बच्चों को क्लासरूम शेयर करना पड़ रहे हैं। एक शिक्षक 2-3 कक्षाओं को एक साथ पढ़ा रहे है ।
मध्यप्रदेश के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में बच्चे अगली कक्षाओं में पहुंच तो जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उनमें से अधिकांश पिछली कक्षाओं की किताबें भी पढऩे में सक्षम नहीं हैं। प्रदेश के स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की रीडिंग स्किल और गणित पूरे देश में सबसे कमजोर पाया गया है। पूरे देश में इस मामले में मप्र दूसरे नंबर पर है। 64 हजार पद खाली हैं सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के, 78.8 फीसदी दूसरी और चौथी के छात्रों को क्लासरूम शेयर करना पड़ रहा है, प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराए गए डाटा के एनालिसिस के आधार पर एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) 2016 में यह बात सामने आई है। साक्षरता दर और सीखने के मामले में बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सबसे पीछे हैं। वर्ष 2020 तक भारत में सबसे ज्यादा वर्किंग एज वाली आबादी लगभग 86.9 करोड़ होगी। इसमें से 43.6 फीसदी युवा इन चार राज्यों में हैं।
श्याम कुमार कोलारे , मोबाइल न- 9893573770 ईमेल ID: shyamkolare@gmail.com

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